म्यांमार की धरती एक बार फिर भूकंप के झटकों से कांप उठी। शुक्रवार, 28 मार्च की मध्य रात्रि को 7.7 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया, जिससे पूरे देश में भारी नुकसान हुआ। भूकंप के बाद दिनभर छोटे-बड़े झटकों का सिलसिला जारी रहा, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।
भूकंप का केंद्र और प्रभाव
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, पहला भूकंप रात 12 बजे आया, जिसका केंद्र म्यांमार के मोनयवा शहर से लगभग 50 किलोमीटर पूर्व में स्थित था। इसका प्रभाव इतना जबरदस्त था कि 12 मिनट बाद ही 6.4 तीव्रता का दूसरा भूकंप महसूस किया गया। इसके बाद रात 11:56 बजे 4.2 तीव्रता का झटका आया और अगली सुबह 4.3 तीव्रता के झटके से फिर से धरती हिल गई।
भूकंप के केंद्र की गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी, जिससे इसका प्रभाव और भी विनाशकारी हो गया। इस त्रासदी में अब तक 150 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 732 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। कई इमारतें, पुल, मठ और मस्जिदें जमींदोज हो गई हैं।
म्यांमार में तबाही का मंजर
म्यांमार के कई प्रमुख शहरों में भारी क्षति हुई है। मांडले शहर में एक मस्जिद गिर गई, जिसमें कई लोग मारे गए। राजधानी नेपीता में सड़कों पर दरारें पड़ गईं, जिससे यातायात ठप हो गया। इरावदी नदी पर बना 90 साल पुराना एक विशाल पुल ढह गया, जिससे कई इलाकों का संपर्क कट गया।
बान विश्वविद्यालय में भूकंप के कारण आग लग गई, जिससे भवन का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। विश्वविद्यालय के छात्र और स्टाफ दहशत में इमारत से भागते नजर आए।
भूकंप के झटके थाईलैंड तक महसूस किए गए
इस भूकंप का असर थाईलैंड तक महसूस किया गया, हालांकि भूकंप का केंद्र म्यांमार में था। ग्रेटर बैंकॉक क्षेत्र में भी इमारतें हिल गईं और कई जगहों पर मामूली क्षति हुई। थाईलैंड भूकंप-प्रवण क्षेत्र नहीं है, लेकिन म्यांमार के निकट होने के कारण इसका प्रभाव वहां भी देखा गया। बैंकॉक में कई ऊंची इमारतें भूकंपरोधी तकनीक के बिना बनाई गई हैं, जिससे संभावित नुकसान की आशंका बढ़ जाती है।
भूकंप के बाद का संकट
भूकंप के बाद म्यांमार में हजारों लोग खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हो गए। अस्पतालों में घायलों की भीड़ उमड़ पड़ी, और चिकित्सा सेवाएं चरमरा गईं।
भूकंप का वैज्ञानिक विश्लेषण
विशेषज्ञों का कहना है कि म्यांमार का यह क्षेत्र ‘सागाइंग फॉल्ट लाइन’ पर स्थित है, जहां 1930 से 1956 के बीच 7 तीव्रता के 6 बड़े भूकंप आ चुके हैं। यह फॉल्ट लाइन म्यांमार के मध्य भाग से होकर गुजरती है और बार-बार भूकंप की वजह बनती है।
बचाव कार्य जारी
बचाव कार्य तेजी से जारी है, लेकिन सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से राहत कार्यों में बाधा आ रही है। प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लोगों की मदद में जुटी हुई हैं। इस विनाशकारी भूकंप के बाद म्यांमार को पुनर्निर्माण की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।