नए साल का पहला दिन जापान के लिए तबाही का पैगाम लेकर आया। 1 जनवरी 2024 को जापान में 7.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसने देश के कई हिस्सों को हिला कर रख दिया। यह झटका इतना शक्तिशाली था कि जापान सरकार को तत्काल सुनामी की चेतावनी जारी करनी पड़ी। लोगों के चेहरों पर डर साफ नजर आ रहा था, क्योंकि यह दृश्य उन्हें 2011 की तबाही की याद दिला गया, जब एक विनाशकारी सुनामी ने जापान के तटीय इलाकों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया था।
दुनिया में हर साल आते हैं 20 हजार से अधिक भूकंप
राष्ट्रीय भूकंप केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, पूरी दुनिया में हर साल करीब 20,000 भूकंप दर्ज किए जाते हैं। इनमें से लगभग 100 भूकंप ऐसे होते हैं, जो जान-माल की क्षति का कारण बनते हैं। इनमें से एक या दो विनाशकारी साबित हो सकते हैं, जैसा कि इस बार जापान में हुआ। भूकंप की तीव्रता जितनी अधिक होती है, उसका असर उतना ही गहरा और व्यापक होता है।
एशिया में क्यों आते हैं ज्यादा भूकंप? हिमालयी फॉल्ट लाइन की भूमिका
भूकंप ट्रैकिंग एजेंसी और भूकंप वैज्ञानिकों के अनुसार, एशिया में भूकंप की अधिकता का एक बड़ा कारण हिमालय बेल्ट में मौजूद फॉल्ट लाइनों को माना जाता है। यह क्षेत्र लगातार प्लेट मूवमेंट की वजह से भूगर्भीय दबाव झेलता है, जो समय-समय पर भूकंप का रूप ले लेता है।अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा भारत सरकार के सहयोग से किए गए अध्ययन में यह पाया गया है कि हिमालय की फॉल्ट लाइन अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है।
अध्ययन के मुख्य बिंदु:
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यह अध्ययन "लिथोस्फीयर" और "जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च (JGR)" में प्रकाशित हुआ है।
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अध्ययन के अनुसार, हिमालय हर साल कुछ सेंटीमीटर उत्तर की ओर खिसक रहा है।
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इस फॉल्ट लाइन की उम्र करीब 700 साल मानी जा रही है।
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अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक सी. पी. राजेन्द्रन के अनुसार, हिमालय में आने वाला अगला बड़ा भूकंप पिछले 500 वर्षों में सबसे भयंकर हो सकता है।
जापान: भूकंप और सुनामी की धरती
जापान भूकंप की दृष्टि से सबसे संवेदनशील देशों में गिना जाता है। यहां साल भर में औसतन 2000 भूकंप आते हैं, जिनमें से कुछ तो बहुत मामूली होते हैं, लेकिन कई खतरनाक भी साबित होते हैं। जापान को हर साल कम से कम एक बार किसी न किसी तीव्र भूकंप या सुनामी का सामना करना पड़ता है। क्यों आते हैं जापान में इतने भूकंप? आइए समझते हैं उसकी भौगोलिक स्थिति को।
जापान की भौगोलिक स्थिति: खतरे की जड़
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जापान एक द्वीपीय देश है, जो प्रशांत महासागर में स्थित है।
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यह देश "प्रशांत रिंग ऑफ फायर" का हिस्सा है — एक ऐसा क्षेत्र जो चारों ओर से टेक्टोनिक प्लेटों से घिरा हुआ है।
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रिंग ऑफ फायर वह क्षेत्र है जहां दुनिया के 75% सक्रिय ज्वालामुखी और 90% भूकंप दर्ज किए जाते हैं।
रिंग ऑफ फायर का आकार घोड़े की नाल की तरह होता है और यह भूकंपों के लिहाज से सबसे संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।
2011 की विनाशकारी सुनामी की यादें ताजा
इस बार 7.6 तीव्रता के भूकंप के तुरंत बाद ही जापान ने सुनामी की चेतावनी जारी कर दी, जिससे लोगों के मन में फिर से 2011 की आपदा की कड़वी यादें ताजा हो गईं।
2011 की सुनामी में:
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15,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
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लाखों लोग बेघर हो गए थे।
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फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट में रेडिएशन लीक हो गया था, जिसने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी थी।
2024 की सुनामी चेतावनी: हालात गंभीर
हालिया भूकंप के बाद जापान के तटीय इलाकों को खाली करवाया जा रहा है। लोगों को ऊंचे क्षेत्रों में जाने के लिए कहा गया है। जापानी मौसम एजेंसी ने बताया कि 3 मीटर तक ऊंची लहरें उठ सकती हैं, जिससे समुद्र तटीय इलाकों में भारी नुकसान हो सकता है।
क्या हम बड़े भूकंप को रोक सकते हैं?
भूगर्भीय विज्ञान के अनुसार, भूकंप को रोकना संभव नहीं है, लेकिन भविष्यवाणी और तैयारी से जान-माल का नुकसान कम किया जा सकता है।
सरकारें क्या कर सकती हैं:
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टेक्टोनिक गतिविधियों की सटीक निगरानी।
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भवनों को भूकंपरोधी बनाना।
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आम जनता को भूकंप सुरक्षा प्रशिक्षण देना।
निष्कर्ष: प्रकृति की चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
जापान में आए इस ताजा भूकंप ने एक बार फिर हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हम प्रकृति के सामने कितने असहाय हैं। चाहे वह हिमालयी क्षेत्र हो या जापान का रिंग ऑफ फायर — भूगर्भीय हलचलों को नजरअंदाज करना अब इंसानियत के लिए बहुत भारी पड़ सकता है। हमें जागरूकता, विज्ञान और संवेदनशीलता के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है, ताकि हम भविष्य में ऐसी आपदाओं से बेहतर तरीके से निपट सकें।